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विश्व पटल पर दिलवालों की दिल्ली साफ़ सुथरे शहरों में कब शामिल होगी ?

क्या आप भी असमंजस में है । दिल्ली दिलवालों की है और पूरे विश्व में दिल्ली को इसी से जाना जाता है। 2014 में प्रदेश के चुनावो में दिल्ली ने पूरे साहस से भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग पर मोहर लगाई और अरविन्द केजरीवाल के रूप में उन्होंने अपने नायक को चुना। केजरीवाल ने जनता से किये हुए अपने मैनिफेस्टो के वादों पर खरा उतरने के लिए दिन रात एक कर दिया और इसी बात का परिणाम है की शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी के मुद्दों पर क्रन्तिकारी कदम उठाये. बजट में शिक्षा पर २५% और स्वास्थय में १२% की वृद्धि की गयी और इस सरकार से पहले किसी और राज्य में कभी भी शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में इतनी योजनाबद्ध तरीके से काम नहीं हुए। एक आम आदमी के लिए मुख्यमंत्री, मंत्रियो और विधान सचिव का पद बहुत बड़ा होता हैं और यही कारण भी रहता है कि कुछ लोग ऐसी भी आशा करते है किं जादू की छड़ी घुमाकर काम हो जाने चाहिए। हिंदी में यह कहावत बड़ी प्रचलित है कि “पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते है”। पिछले दो सालों में आप आदमी पार्टी के कार्यो को देखकर आप चुनाव में की गयी अपनी पसंद पर गर्व कर सकते है। आप कुछ वादे पूरे कर पायी है और कुछ वादे अभी तक नहीं । इसका मुख्य कारण यही है की दिल्ली राज्य के कुछ काम मुख्यमंत्री स्वतंत्र तौर पर नहीं कर सकते , उसके लिए उन्हें माननीय गवर्नर की मंजूरी लेनी पड़ती है। ऐसे ही कुछ कार्य MCD के अन्तर्गत आते है, उदाहरण के रूप मैं  सड़को की रखरखाव, पानी की निकासी, मोहल्लो में सीवरेज, पार्क आदि का निर्माण और रखरखाव और इसके साथ दिल्ली के कूड़ा कचरा को सनुयोजित तरीके से इकठ्ठा करके दिल्ली के सौन्द्रीयकरण का प्रबंधन करना। दिल्ली की सड़कों की लंबाई लगभग 3०,००० किमी. है, जिसमे से MCD के अधिकार क्षेत्र में 88 प्रतिशत आती है।  पिछले दस वर्षो से MCD पर भारतीय जनता पार्टी काबिज है और अभी तक इन कार्यो में कोई भी आधुनिक कदम नहीं उठाये गए है। भारत अंतरिक्ष तक जा पंहुचा है, विश्व में कूड़े कचरे के प्रबंधन के लिए काफी वैज्ञानिक खोज हो चुकी है। उदहारण के तोर पर यूरोप में स्वीडन देश का प्रबंधन तो काफी प्रशंसनीय है, उनको अतिरिक्त बिजली उत्पादन के लिए कूड़े का बाहर से आयत करना पड़ता है स्वीडन देश की जनसँख्या १ करोड़ के करीब है जो दिल्ली से आधी है। कहने का तातपर्य यह है की जब आप एक ईमानदार, पढ़े लिखे और समझदार नेता को चुनेंगे तो अगले ५ सालो में हम भी कूड़े और ख़राब सड़को की समस्या का हल निकाल सकते है। अगर आप भारतवर्ष में नजर घुमाकर देखे तो काफी राज्यो में वही पुराने राजनितिक दल काफी वर्षो से सरकार चला रहे है। ऐसा मेरी नज़र में नहीं आया की भारत के किसी भी राज्य में आधुनिक तकनीको का इस्तेमाल करके कूड़े कचरे का हल निकल गया हो व्यापक स्तर पर। अब यह देखना दिलचस्प होगा की आगामी चुनावो में दिल्ली की जनता क्या रुख अपनाती है और किसे यह जिम्मेवारी सोंपती है जो उनके सपनो के शहर दिल्ली को साफ़ सुथरा बना सके ताकि विश्व पटल के साफ़ शहरो में दिल्ली का भी नाम लिया जाये आप का वोट है, आप सोचिये समझिये और अपने मतदान का इस्तेमाल करे। आगामी अप्रैल 23 को MCD के चुनाव है !

Author :-
Vikas Rattan Goyal

(The author is a writer, an IT consultant and political policy analyst)

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