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जानिए आखिर क्यों कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुई रीता बहुगुणा

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चुनावी मौसम शुरू होते ही नेताओं के पाला बदलने का सिलसिला भी शुरू हो जाता है ।नेता चार साल एक पार्टी में रहते हैं और चुनावी साल आते ही अपने लिए बेहतर अवसर ढूंढने लगते हैं।कुछ तो चुनाव के आखिरी दिन तक पाला बदल लेते हैं।इसी कड़ी में नया नाम है रीता बहुगुणा जोशी का।रीता जी ने करीब 24 साल तक कांग्रेस में रहने के बाद अपने लिए बीजेपी में जगह ढूंढ ली है ।कांग्रेस के नेता कुछ भी कहें कि नेता आते जाते रहते हैं पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ता ,लेकिन जनाब सच्चाई ये है कि रीता बहुगुणा जोशी के कहीं भी आने जाने से फर्क तो पड़ता है।खास कर कांग्रेस को ज्यादा फर्क इसलिए पड़ता है क्योंकि पार्टी पहले से ही उत्तर प्रदेश में रसातल में है।ऐसे में एक इतने पुराने सिपाही का पाला बदलना कांग्रेस को परेशान तो कर ही रहा होगा।ऐसा नहीं है कि रीता बहुगुणा जोशी ने पहले पार्टी नहीं बदली है,वो एक बार कांग्रेस छोड़ कर समाजवादी पार्टी में गयी थी लेकिन 10 महिने में ही वापस आ गयी।आज की वर्तमान राजनितिक परिस्थिति के बारे में आगे बात करेंगे पहले बात करते हैं रीता बहुगुणा जोशी के परिवार के बारे में।रीता बहुगुणा जोशी स्वतंत्रता सेनानी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नन्दन बहुगुणा की बेटी हैं।हेमवती नन्दन बहुगुणा कांग्रेस के कद्दावर नेता थे।वो भारत छोड़ो आंदोलन के समय 1942 से 1946 तक चार साल जेल में रहे।वो 1970 में केंद्र की इंदिरा गांधी सरकार में राज्य मंत्री रहे और फिर 1973 से 1975 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे।मूलतः वो पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले थे लेकिन उनका ज्यादातर समय इलाहाबाद में बिता।उनके राजनितिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब वो 1984 के लोकसभा चुनाव में अमिताभ बच्चन से हार गए।इसके पांच साल बाद 1989 में बीमारी के कारण उनकी मृत्यु हो गयी।जाहिर सी बात है इतनी बड़ी शख्शियत की बेटी होना ही आपके लिए राजनीती में सफलता की गारंटी होता है,उसपर रीता बहुगुणा जोशी ने अपनी मेहनत से खुद की एक अलग पहचान बनायी है।रीता बहुगुणा जोशी ने इलाहबाद यूनिवर्सिटी से इतिहास में पीएचडी की है और फिर यहीं इतिहास की प्रोफेसर भी रहीं।रीता 1995 से 2000 तक इलाहबाद की मेयर रही हैं वो कांग्रेस की महिला इकाई की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रही हैं,फिर वो कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई की अध्यक्ष रही हैं,फ़िलहाल वो लखनऊ कैंट से विधायक हैं।जब से रीता के भाई और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भाजपा में शामिल हुए थे तभी से रीता के भी भाजपा में जाने की अटकलें चल रही थी।कहा जा रहा था कि रीता कांग्रेस से नाराज चल रही हैं।इस ताबूत में आखिरी कील ठोकने का काम किया कांग्रेस द्वारा शिला दीक्षित को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाना।कहा गया कि शिला दीक्षित को ब्राह्मण चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट किया जायेगा ,जबकि रीता भी ब्राह्मण थीं,पुरे प्रदेश में उनकी पहचान थी,फिर भी कांग्रेस ने उनकी जगह दिल्ली की सत्ता से बाहर हो चुकी,79 साल की शिला दीक्षित पर भरोसा जताया।इसी का असर था कि वो राहुल गांधी की खाट सभा में भी नजर नहीं आईं।इसके बाद ही बीजेपी ने उन्हें अपने खेमे में लाने का प्रयास तेज कर दिया था,इसमें अहम भूमिका निभाई उनके भाई विजय बहुगुणा जोशी ने।वो रीता को इस बात के लिये मनाने में कामयाब रहे कि भाजपा ही उनके लिये सही विकल्प है।आज उन्हें अमित शाह ने खुद पार्टी में शामिल कराके ये सन्देश देने की कोशिश की है कि रीता बहुगुणा जोशी भाजपा के लिए कितनी महत्वपूर्ण साबित होने वाली हैं।

Amit shah welcoming rita bahuguna in BJP
Amit shah welcoming rita bahuguna in BJP

इस मौके पर रीता बहुगुणा जोशी ने राहुल गांधी के खून की दलाली वाले बयान की निंदा की और कहा कि पूरे देश को राष्ट्रहित में प्रधानमंत्री के साथ खड़े होना चाहिए।

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साथ ही उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक के लिए प्रधानमंत्री की जमकर तारीफ भी की।साथ ही उन्होंने ये उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जरूर जीतेगी।रीता बहुगुणा जोशी के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस समर्थक उनके पुराने ट्वीट और बयान निकाल रहे हैं जो उन्होंने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ दिए थे।पेश है ऐसे ही उनके कुछ ऐसे ही ट्वीट्स

इस पर बीजेपी समर्थकों का कहना है कि कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है।जब भी कोई व्यक्ति किसी पार्टी में होता है तो पार्टी लाइन ही बोलता है और ये कॉन्ग्रेस पार्टी की लाइन थी न की रीता जी की।

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