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अमीर सोने की दुकान पर और गरीब बैंक की लाईन में धक्के खा रहा है !

एकतरफ नियम बनता नहीं है कि उसको तोड़ने और न मानने के तरीके पहले से बाजार में आ जाते हैं। ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब हमारे प्रधानमंत्री मोदीजी ने 500-1000 के नोट बंद करने की घोषणा की। हुआ कुछ यूँ कि खबर सुनते ही जिनके पास भी 500-1000 के नोट थे वो बहुत परेशान हो गए और अपने नोटों को बदलवाने की जुगत में लग गए। जिनका अपना जुगाड़ था पहले से वो तो बेफिक्र बगैर मेहनत के अपने नोटों को बदलवाने लगे या यूँ कहें कि बदलवा चुके होंगे। और जिनका कोई अपना, परिचय या जुगाड़ नहीं वो बेचारे तो बैंक में लग के धक्के खाने शुरू कर चुके हैं। बात यहीं नहीं रूकती है.. अब बात उनकी जो किसी गलत तरीके से, अवैध तरीके से रुपये जमा करते हैं.. वो सब बेफिक्र हैं ऐसा नहीं है.. वो भी धक्के खा रहे हैं… कहाँ.. अजी सोने कि दुकानों पे… कहते हैं न “सोना शुभ होता है” तो वो भी अपने काले, पीले, नीले धन को सोने सा शुद्ध करवाने में लग गए।

जब बैंक खुले तो लोगों की बैंक के अन्दर ही नहीं.. बैंक के बहार सड़क पर दूर तक लम्बी लम्बी कतारें देखने को मिली। काफी लोगों ने तो बैंक के आगे सुबह 5-6 बजे से ही लाइन लगाना शुरू कर दिया था।

आम आदमी को बैंक में धक्के खाने और चुपचाप रहने के सिवाए कुछ नहीं मिला। वही जबकि सेठ, महाजनों, बड़े व्यापारियों एवं उद्योगपतियों, दबंगों ने अपने लोगों से मिलीभगत करके अपने नोटों को बदलवा लिया। यहाँ तक तो ये भी देखने को मिला कि लोगों ने अपने नौकरों को, कर्मचारियों को लाइन में लगने के लिए मजबूर किया और वो बिचारे ऐसा करते रहे। ये आम आदमी चाहे गरीब हो या मध्यम वर्गीय उसे धक्के खाने ही पड़े और सभी आवश्यक मुसीबतों को सहने का कर्तव्य निभाता रहे।

लाइन सिर्फ बैंकों में ही नहीं दिखी.. जहां जहां से नोट बदले जा सकते थे सभी जगह लोग लम्बी लाइन में अपनी प्रतीक्षा करते रहे यहाँ तक कि सोने की दुकानों पे भी लोगों को धक्के खाते देखा गया। जी हाँ जैसा कि यह खबर फैलाई जा रही है कि काला धन के लिए ऐसा किया गया है तो जिन्होंने भी गलत तरीके से संपती इक्कठा की है, वो अपनी जमा पूँजी को सफ़ेद करने के लिए सोना खरीदने में कोई झिझक नहीं दिखा रहे। कुछ धनाढ्य लोग भी जिन्होंने अपनी मेहनत से कमाई की है वो भी सोने कि दुकान पर चढ़ते हुए दिखाई दिए। गौरतलब है कि 500-1000 के नोट बंद होने के बाद बड़ी संख्या ने कैश जमा करके रखने वाले सोने-चांदी की दुकानों पर गए और दोगुनी कीमत पर आभूषण खरीदते देखे गए।

वहीँ जिस तरह कई बैंकों में नोटों के खत्म हो जाने से लोग हताश और निराश दिखे तो दूसरी तरफ सोने कि दुकानों, शोरूम पे सेना कम पड़ गया है, जिसके चलते कारोबार कागज पर हो रहा है। ज्वेलर्स पैसा लेकर सोने का वजन कागज पर लिखकर दे रहे हैं। ये कैसी बात हुई कि जिन किसानों, मजदूरों ने सालों मेहनत करके अपने घर बनाने, बच्चों की पढाई, लड़की शादी जैसे कार्यों के लिए धन जमा किया होगा, चूँकि ऐसे लोगों का किसी भी बैंक में कोई खाता नहीं होता, तो वो लोग क्या करेंगे। अब… क्या उन तक सुविधा पहुँचाने के लिए सरकार कोई कदम उठायेगी या उनके नोटों का कुछ नहीं हो पायेगा। नेताओं के तो बल्ले बल्ले ही हैं चाहे मौजूदा सरकार की पार्टी के लोग नोट बदल चुके हो.. बाकि अपने जुगाड़ से बदल लेंगे.. इंडिया में तो जुगाड़ फेमस ही है।

इससे ये साफ़ हो जाता है कि सरकार ने ये कदम आम लोगों की सुविधाओं को देखते हुए पर्याप्त होमवर्क नहीं किया है और बगैर तैयारी के मैदान में उतर गयी। पर जिन लोगों का कोई अपना सगा नहीं उनका क्या… जरा सोंचिये… !

आपसे अनुरोध है गर आपको ऐसा कोई मिलता है तो आप दिखने के लिए ही सही इंसानियत से नाता न तोडें।

सदैव आपका प्रशंसक,
अधिकार श्रीवास्तव।
Fb: /adhikar7aspires.
Twitter: @adhikaraspires.

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