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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश :सिनेमा हॉल में गाना होगा राष्ट्रगान!

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बुधवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश जारी किया है कि सिनेमा हॉल में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाना चाहिये ।इस दौरान स्क्रीन पर तिरंगा झंडा का प्रदर्शन होना चाहिये तथा राष्ट्रगान के सम्मान में सभी को राष्ट्रगान गाना चाहिये तथा खड़े होना चाहिये।
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यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल के श्याम नारायण चौकसे द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनाया।
फैसला सुनाते हुए जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने यह भी कहा कि राष्ट्रगान से न तो व्यापारिक लाभ लेना चाहिये ,न तो इसे कहीं अनुचित जगह पर छापा या बजाय जाना चाहिये।इसे जब बजाया जाये तो पूरा बजाय जाना चाहिये न की अधूरा बजाना चाहिये या किसी और रूप में बजाना चाहिये।
पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आज की पीढ़ी राष्ट्रगान भी सही ढंग से नहीं गा पाती है ,उन्हें ये सीखाना होगा।उन्हें ये एहसास दिलाना होगा की हमारी मातृभूमि ही हमारे लिये सबकुछ है।नागरिकों के मन में देशभक्ति की भावना जगाना कहीं से गलत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश जारी करते हुए कहा कि ये आदेश 7 दिनों में पूरे देश में लागू हो जाना चाहिये।इसके लिये सभी राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेश के मुख्यसचिवों को फैसले की कॉपी भेजी जाये।
केंद्र सरकार ने इसका जवाब देते हुए कहा कि वो जल्द ही इस फैसले के बारे में सभी राज्यों के मुख्यसचिवों को अवगत करायेगी और इसे लागू कराने के लिये आवश्यक निर्देश देगी।
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आपको बता दें कि 1960 के दशक में भी सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान बजाया जाता था लेकिन बाद में राष्ट्रगान के अपमान की शिकायतों के बाद सरकार ने इसे बंद कर दिया था।
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भारत का कानून राष्ट्रगान के बारे में कहता है कि सभी नागरिकों को राष्ट्रगान एवं अन्य राष्ट्रिय प्रतीकों का सम्मान करना चाहिये लेकिन किसी से जबर्दस्ती राष्ट्रगान नहीं गवाया जा सकता।अगर कोई राष्ट्रगान में खलल डालता है या किसी को राष्ट्रगान गाने से रोकता है तो उसे 3 साल तक की सजा हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों में प्रतिक्रियाएं आ रही हैं ।कुछ लोगों का कहना है कि ये बिलकुल सही निर्णय है तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि सिनेमा हॉल में बच्चे,बूढ़े,दिव्यांग सभी तरह के लोग होते हैं जिनके लिये राष्ट्रगान के समय खड़े होना संभव नहीं है।
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पिछले कुछ घटनाओं में ऐसे लोगों के साथ मारपीट की भी खबरें आयी हैं,ऐसे में ये उचित नहीं है कि इसे अनिवार्य बनाया जाये।
बहरहाल देखना होगा की ये मामला आगे क्या रुख लेता है!

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