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नोट बदलने के लिये बैंक की लाइन में देर तक लगे रहने से बुजुर्ग की मौत!

1000 और 500 रुपये के नोट के बैन के कारण पुरे देश में लोग परेशान हैं,देश के विभिन्न हिस्सों से रोज कई तरह की खबरें आ रही हैं।नोट बैन होने के कारण सदमे से कुछ लोगों के सदमे से मौत की खबरें आयीं।जिनके घरों में शादियां हैं वो परेशान हैं कि एक सप्ताह में 20 हजार निकाल कर वो कैसे शादी में होने वाले खर्चों को संभालेंगे।गरीबों को अपने रोज के खर्चे चलाना मुश्किल है क्योंकि उनके पास जो 500 और 1000 के नोट है उससे न वो घर के लिये चावल ले सकते हैं,न बच्चे के लिये दूध।इस बीच मुम्बई के मुलुंड इलाके से एक ऐसी हृदयविदारक खबर आयी जिसने सरकार के उन दावों की पोल खोल दी जिसमें ये दावा किया गया था कि बैंकों में सभी जरूरी व्यवस्था है और लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।मुलुंड के एसबीआई ब्रांच में नोट बदलने पहुंचे 73 साल के बुजुर्ग विश्वनाथ वर्तक की मृत्यु हो गयी।दरअसल वर्तक बहुत समय से नोट बदलने के लिये बैंक में लाइन में लगे थे,अचानक उन्हें चक्कर आया और वो वहीं गिर गये।

Vishvanath vartak in way to hospital,doctors confirmed dead
Vishvanath vartak in way to hospital,doctors confirmed dead

उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।विश्वनाथ वर्तक की मौत अपने पीछे कई सवाल छोड़ गयी है ।जिसमें सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये है कि अगर सरकार की तैयारी इतनी नहीं थी तो फिर अफरातफरी में ये निर्णय लागु करने की क्या जरूरत थी।अभी देश के दूर के इलाकों की बात तो छोड़ दीजिये।मुम्बई जहां रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया का प्रधान कार्यालय है ,वहां के भी सभी बैंक में अभी नये नोट नहीं पहुंचे हैं।इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार और फ़िल्मकार विनोद कापरी ने ट्वीट कर मुम्बई के एक एसबीआई ब्रांच के बारे में जानकारी दी जहां अब तक पैसे नहीं पहुंचे हैं।


जिन बैंकों में पैसे पहुंचे हैं वहां अत्याधिक भीड़ उमर रही है,जिसके कारण ऐसे हादसे सामने आ रहे हैं।सरकार को ये निर्णय लेने से पहले अपनी तैयारी तो पूरी कर लेनी थी,क्योंकि इस फैसले से कालाधन के उन्मूलन में कितनी सफलता मिली ये तो पता नहीं लेकिन आम आदमी के सर पर मुसीबतों का पहाड़ जरूर टूट पड़ा है।

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