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‘महाकवि’ : हिंदी कविता के एक नए युग का आरम्भ !

14956480_10154642738663454_1827964116232452519_n-1आज की युवा पीढ़ी जब संगीत के नाम पर रॉक सुन रही है और गीत के नाम पर रैप, इस दौर में एक युवा वर्ग ऐसा भी है जो डॉ कुमार विश्वास को सुनता है। अब आप कहेंगे कि डॉ कुमार विश्वास तो कवि हैं उनका रॉक से क्या वास्ता? बिलकुल सही कहा आपने, उनका रॉक से कोई वास्ता नहीं है लेकिन उन्होंने युवाओं को कविता ऐसे सुनाई की युवा उसमें पूरी तरह खो गये और वे एनरिके, पिटबुल को भूलकर कुमार विश्वास को गुनगुनाते रहते हैं। आज के दौर में शायद ही कोई ऐसा युवा होगा जिसके मोबाइल में कुमार विश्वास की कविताएँ नहीं होगी। फिर चाहे वह किसी भी पार्टी का हो, अकेले में तो कुमार विश्वास की कविता ही सुनता है।

आज का युवा कुमार विश्वास को तो जानता है लेकिन हिंदी के महान कवियों की रचना से, उनकी जीवनी से वो या तो दूर हो गया है, या तो अनभिज्ञ है। ऐसे महाकवियों से आज की युवा पीढ़ी को मिलवाने की जिम्मेदारी एक बार फिर डॉ कुमार विश्वास ने उठाई है। एबीपी न्यूज़ पर 5 नवम्बर से हर शनिवार-रविवार को वो लेकर आ रहे हैं ‘महाकवि’। ‘महाकवि’ में कुमार आज की पीढ़ी को हमारे देश के 10 महान कवियों से परिचय करवायेंगे, जिनकी कवितायें स्कूल के दिनों में पढ़कर आप बड़े हुए, लेकिन समय के साथ उन्हें भूल गये, उनसे आप का एक बार फिर साक्षात्कार कराने आ रहे हैं कुमार विश्वास। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर, डॉ हरिवंश राय बच्चन , सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, महादेवी वर्मा, अज्ञेय, दुष्यंत कुमार जैसे महिषियों के जीवन के तमाम अनछुए पहलुओं से आपको अवगत करायेंगे डॉ कुमार विश्वास। साथ ही उनकी बेहतरीन रचनाओं को बिलकुल नये अंदाज में संगीतबद्ध करके आप के सामने अपनी बेहतरीन आवाज में प्रस्तुत भी करेंगे। महाकवि के शुरू होने की बेताबी ऐसी है की आम तो आम, कई प्रसिद्ध कवियों, शायरों ने भी इस प्रयास के लिये कुमार विश्वास को बधाई संदेश भेजे हैं। अभी तो ये कार्यक्रम 10 सप्ताह तक चलेगा, जिसमें हरेक सप्ताह में आप एक महाकवि से रुबरु होंगे, लेकिन दर्शकों की मांग पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। ये बातें खुद डॉ कुमार विश्वास ने महाकवि के कर्टेन रेजर प्रोग्राम के दौरान एक महिला के सवाल पर बतायीं थी।

जब आप राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ‘सिंहासन खाली करो की जनता आती है’ संगीत के साथ सुनेंगे तो यकीन मानिये आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे, उसपर डॉ कुमार विश्वास की आवाज का जादू आपको एक अलग ही दुनिया की सैर पर ले चलेगा। दुष्यंत कुमार की ‘सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिये’ हम सब ने सुनी होगी, लेकिन क्या आपने कभी सोचा था कि अगर इसको संगीतबद्ध कर दिया जाये तो आपके अंदर के आंदोलनकारी की ऊर्जा कितनी बढ़ जायेगी? इसके बारे में बोलते हुए डॉ कुमार विश्वास कहते हैं कि दुष्यंत और आंदोलन एक दूसरे के पूरक रहे हैं, शायद इसिलये कुमार विश्वास (जो खुद भी एक आंदोलनकारी हैं) ने दुष्यंत को भी हमारे सामने एक नये कलेवर में पेश करने का निर्णय लिया है।

इन महाकवियों की ऐसी कई बेहतरीन कवितायें हैं जिन्होंने हमारा बचपन गुलजार किया है, इस प्रयास के माध्यम से कुमार विश्वास हम सब को फिर से बचपन में वापस ले जाना चाहते हैं, फिर से हमें अपने विद्यालय में वापस ले जाना चाहते हैं, इन महाकवियों को सुनते समय निश्चित तौर पर आपको अपने हिंदी के शिक्षक भी याद आने वाले हैं, जिन्होंने बचपन में पहली बार इन कवियों से आपका परिचय करवाया था। आज के दौर में जब सभी न्यूज़ चैनल टीआरपी की अंधी रेस में दौड़ रहे हैं, उस दौर में एबीपी का डॉ कुमार विश्वास के साथ मिलकर ये प्रयास करना वाकई काबिले तारीफ है। इसके लिये तमाम हिंदी प्रेमी एबीपी को भी बधाई दे रहे हैं। अभी ये प्रयास भले ही कई लोगों को छोटा लगे लेकिन हिंदी प्रेमी ही जानते हैं कि ये कितना बड़ा प्रयास है।

आजतक भारतीय टेलीविजन के इतिहास में हिंदी के लिये इतना भागीरथ प्रयास किसीने नहीं किया, जो कुमार विश्वास और एबीपी ने किया है। इसके परिणाम आपको जरूर नजर आयेंगे। इसका नजारा महाकवि के कर्टेन रेजर प्रोग्राम के दिन भी देखने को मिला जब इस प्रोग्राम को काफी संख्या में लोगों ने देखा और सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफार्म पर इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा भी की। डॉ कुमार विश्वास नये दौर के कवि हैं, पूरी दुनिया में करोड़ों लोग उनके फैन हैं, ये भी शायद पहली बार हुआ होगा की किसी कवि के प्रशंसकों को फैन कहा जाने लगा, पहले इस शब्द पर एकाधिकार सिनेमा और टेलीविजन के कलाकारों का ही था। कुमार विश्वास जो भी करते हैं अपने अंदाज में करते हैं, नये तरीके से करते हैं, लेकिन इस नयेपन के चक्कर में वो कविता की आत्मा को मरने नही देते, उन्होंने बार-बार कहा है कि वो हिंदी का बाजार बनाना चाहते हैं, बाजार की हिंदी नहीं।

इन महाकवियों से नयी पीढ़ी को अवगत करा कर कुमार विश्वास अपने आदर्शों को एक श्रद्धांजलि दे रहे हैं। हिंदी माँ को भी अपने इस बेटे पर गर्व होगा जो दिन रात पूरी दुनिया में उसकी विजय पताका लहरा रहा है। आप सब की तरह हमें भी इंतजार है महाकवि का, जो की हिंदी के गौरवमयी इतिहास को वर्तमान में फिर से गौरवान्वित करने वाला है।

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