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लोकनायक :some not so told Stories


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इस देश में जब भी आजादी के बाद हुए आंदोलनों का जिक्र होगा तो निःसंदेह उसमें बिहार आंदोलन या सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन का नाम सबसे ऊपर लिखा जाएगा। इस आंदोलन ने सत्ताधीशों को हमेशा के लिए यह सन्देश दे दिया की वे आंतरिक गड़बड़ी(अनुच्छेद 352)का बहाना बनाके देश पर आपातकाल थोपने की दोबारा  कभी जुर्रत न कर सके।इस आंदोलन के अगुआ थे भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण ।जेपी को सामाजिक सेवाओं में उनके योगदान के लिए 1965 में एशिया का नावेल कहे जाने वाले मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया।उन्हें 1999 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानीत किया गया।आज हम आपके सामने पेश करेंगे जेपी से जुड़ी कुछ चुनिंदा कहानियों को जिसके बारे में कम ही चर्चा हुई है,क्योंकि परीक्षा में आने वाले सवालों का जवाब तो आपको गूगल बाबा दे ही देंगे।आज देश जेपी की 115वीं जयंती मना रहा है तो आपको ले चलते हैं  जेपी की उस दुनिया में

जेपी का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा में हुआ था।इन्हें 9 वर्ष की उम्र में ही पढ़ने के लिए पटना के कॉलेजिएट स्कूल भेज दिया गया।इन्होंने 1919 में रौलेट एक्ट के विरोध में अबुल कलाम आजाद को सुनने के बाद पटना कॉलेज की अंग्रेजी शिक्षा छोड़ दी और डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा स्थापित बिहार विद्यापीठ में शामिल हो गए।
1920 में इनकी शादी प्रभावती देवी से हुई।1922 में ये उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अमेरिका चले गए और अपना खर्च निकालने के लिए गैरेज,गोदाम सहित कई जगह काम किया।1929 में माता जी की तबियत खराब होने पर इन्होंने पीएचडी बीच में ही छोड़ दी और भारत आ गए।
1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन और फिर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में इन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया।जेपी आंदोलन के लिए कितने महत्वपूर्ण थे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की 1945 में गांधीजी ने अंग्रेजों के सामने शर्त रख दी की जब तक जेपी को रिहा नहीं किया जाता अंग्रेजों के साथ कोई बात नहीं होगी।इसके बाद जेपी रिहा हुए।

भारत छोड़ो आंदोलन के समय की एक रोचक घटना है जेपी के हज़ारीबाग़ जेल से भागने की।1942 में दिवाली की रात जब सभी जेल के स्टाफ दिवाली मनाने में व्यस्त थे जेपी और उनके 5 साथियों ने जेल की दीवाल फ़ानी और भाग गए।इन्होंने लुंगी का इस्तेमाल दीवाल तड़पने के लिए किया।रस्ते में जेपी के पैर कट गए और चल नहीं पा रहे थे तो योगेंद्र शुक्ला उन्हें अपने कंधे पर बिठा कर गया तक ले गए।जेपी के भागने की खबर जेल अधिकारियों को 9 घण्टे बाद लगी तब तक जेपी उनकी गिरफ्त से कोसों दूर थे।जेपी पटना में अपने सबसे करीबी मित्र गंगा शरण सिन्हा के साथ रहते थे।
आजादी मिलने के बाद लार्ड माउंटवेटेन के सुझाव पर नेहरू ने जेपी को अपनी कैबिनेट में शामिल होने का न्योता दिया।नेहरू जी के मृत्यु के बाद शास्त्री जी ने कहा कि अगर जेपी प्रधानमंत्री बनने को राजी हों तो वो इस पद से पीछे हट जायेंगे।लेकिन जेपी ने हमेशा गांधीजी की राह पर चलते हुए सत्ता से दूरी बनाए रखी।

1975-77 के सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन में उन्होंने इंदिरा गांधी को आपातकाल हटाकर चुनाव कराने पर मजबूर कर दिया और चुनाव में विरोधी दलों को एककर के जनता पार्टी का गठन किया और इंदिरा गांधी को मात दी और खुद प्रधानमंत्री बनने की जगह मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री बनाया।
आंदोलन के दौरान एक दिन जेपी को निशाना बनाकर लाठी चार्ज की गयी जिसमे उनके साथ चल रहे नानाजी देशमुख ने उन्हें बचाया।कहा ये भी जाता है कि लालू प्रसाद यादव ने खुद लाठी खा कर जेपी को बचाया और रातों रात छात्र नेताओं के अगुआ बन गए।

Lathi charge on JP during emergency
Lathi charge on JP during emergency

आज की राजनीती में सक्रिय ज्यादातर नेता(खासकर यूपी बिहार से)जेपी आंदोलन की ही उपज हैं।

 

Sushil modi,nitish kumar and lalu prasad yadav emerged as a student leader during JP movement
Sushil modi,nitish kumar and lalu prasad yadav emerged as a student leader during JP movement

8 अक्टूबर 1979 को अपने जन्मदिन से 3 दिन पहले उनकी मृत्यु हो गयी।जेपी भले आज हमारे बीच नहीं है पर राजनैतिक विरादरी में उनकी उपस्थिति अब भी है।

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