Home / Others / मोदीराज में किसान आत्महत्या की घटनाएं चालीस प्रतिशत बढ़ीं, क्या वास्तव में बागों में बहार है ?

मोदीराज में किसान आत्महत्या की घटनाएं चालीस प्रतिशत बढ़ीं, क्या वास्तव में बागों में बहार है ?

राष्ट्रपति द्वारा गणेश शंकर विद्यार्थी अवार्ड से नवाज़े जा चुके पत्रकार रविश कुमार ने प्राइम टाइम में सरकार पर तंज कसते हुए एक जुमला कहा “बागों में बहार है” जो की देखते ही देखते सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा बन गया और कुछ ही घंटो में ट्विटर के टॉप ट्रेंड्स में आ गया, लोग समीक्षा करने लगे और ये बहस होने लगी की क्या “अच्छे दिन” और “बागों में बहार है” एक ही जुमले हैं ! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव से पहले लगभग हर भाषण में ये वादा किया था की अच्छे दिन आने वाले हैं यहाँ तक की जीतने के बाद भी प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके कहा की जल्द ही अच्छे दिन आने वाले हैं |

आईये २०१४ के बाद की परिस्थियों पर नज़र डालते हैं और जाने की कोशिश की करते हैं की क्या सच में बागों में बहार है | लोकसभा चुनावों के कुछ ही समय बाद कश्मीर में चुनाव हुए तो नतीजों में किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और भारतीय जनता पार्टी ने PDP के साथ मिलकर सरकार बना ली | भाजपा के सत्ता में आते ही कश्मीरी अलगाववादी गुटों ने सेना पर हमले और पत्थरबाज़ी तेज कर दी इसी बीच जुलाई महीने में आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद से आज तक कश्मीर के लगभग १० जिलो में कर्फ्यू की स्तिथि जस के तस बनी हुई है | कश्मीरी भी तो भारतीय ही हैं और अगर कश्मीर में बहार नहीं है तो देश में बहार होने का ढोल पीटना एक तरह से बेईमानी होगा | वही दूसरी तरफ पिछले दो सालों में लगभग 500 से अधिक जवान मारे जा चुके हैं जो की एक अघोषित युद्ध से कम नहीं है ऐसे में आप खुद से सवाल करिये क्या सच में बागों में बहार है ?

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार मोदी सरकार में किसानों की आत्महत्या की घटनाओं में लगभग चालीस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी आयी है जहाँ २०१४ में ५६५० किसानों ने आत्महत्या की वही २०१५ में ये आकड़ा लगभग ८००० तक पहुच गया अब भला जब बागों में बहार लाने वाले किसान ही आत्महत्या करेंगे तो अच्छे दिनों की बात करना बेवकूफी होगी !

अभी के हालातों को देखकर तो यही लग रहा है की जनता को अच्छे दिन के लिए अभी और इंतज़ार करना पड़ेगा |

Comments

About Ajay Singh

mm
Ajay Singh is an Entrepreneur who write about Sports in thenachiketa.

Check Also

जूते मार देना, फांसी चढ़ा देना, चौराहे पर लटका देना, देश में नई तरह की राजनीति हो रही है |

  आज नोटबंदी के पचास दिन पूरे हो गए और देश भर में स्थिति जस …

Advertisment ad adsense adlogger