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‘तीन तलाक’ पर कविंदर कुंडू की त्वरित टिपण्णी,जरूर पढ़ें

तलाक! तलाक! तलाक!

देश आजकल वैश्विक स्तर पर चर्चा में है।सर्जिकल स्ट्राइक को जिस तरह पेश करके वाहवाही बटोरी गयी तथा राजनीतिक प्रयोग हुआ वो कहीं ना कहीं विश्व में चर्चा का केंद्र बना।हालांकि नेताओं की बयानबाजियों ने सेना के मनोबल को आंकने का गलत तरीका अपनाया। किसी ने सेना को हनुमान बताकर खुद को जाबवंत सिद्ध करने की असफल कोशिश की।
खैर जो भी हो सेना बधाई की पात्र है और अगर सेना को राजनीति से अलग रखा जाए तो ज्यादा बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे..
चलिए एक और मुद्दे की बात करें।भारत के अतीत निर्माण में एक आबादी का बड़ा योगदान रहा है।1206 से 1757 तक का भारत का काल मुस्लिम राजाओं का काल कहलाता है। इस्लाम का आगमन भारत में विवधता लेकर आया। दो विभिन्न संस्कृतियों का मेल हुआ। अब इन्हीं संस्कृतियों में टकराव की खबर हर रोज के अखबार की ब्रेकिंग न्यूज़ बनती है। आजकल इस्लाम संस्कृति का एक तथाकथित कानून “तीन तलाक ” काफी सुर्खियों में है। समान नागरिक सहिंता को इससे जोड़कर देखा जा रहा है। इतिहास में मार्टिन लूथर(जर्मनी),इंग्लैंड की शानदार क्रांति ,नेपोलियन (फ़्रांस) सभी ने समान नागरिक सहिंता लाने का प्रयास किया।
talaq-650-istock_650x400_61460963127.jpgकट्टर इस्लामिक देश तुर्की सहित 22 देशो ने ‘तीन तलाक’ को गैर क़ानूनी घोषित किया हुआ है।अपने लड़ाकू भाई पाकिस्तान ने भी 1966 में इसे अवैध करार दिया था। भारत देश में जिसकी लगभग 14 फीसदी आबादी सीधे ‘तीन तलाक’ से जुड़ी है।सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन याचिका में भारतीय मुस्लिम महिलाएं ‘तीन तलाक’ को खत्म करने के लिए प्रयासरत है। इस मुस्लिम कानून के कारण बहुत से मुस्लिम घर बिखरे हैं। घर बिखरने की इतनी आसान और संक्षिप्त प्रक्रिया होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

समय पुनर्विचार का है।एकता को बनाए रखने का ,विविधता को समेटने का और घर को आबाद करने के लिए क्यों ना “तीन तलाक” को समाप्त किया जाए और समान नागरिक सहिंता लागू करने का प्रयास किया जाए।
गौर फरमाइएगा…..

मंजर काफी देख लिया हमने बरबादी का,,
इतना आसान मत बनाओ अब टूटना शादी का..
कहने भर से होता नहीं सम्मान यहाँ नारी का,,
हक़ अदा करना होगा हमको आधी आबादी का..

लेखक –

कविन्द्र कुण्डू(युवा कवि और ज्वलंत मुद्दों पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक)

(नोट – ये लेखक के निजी विचार है )

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One comment

  1. अति उत्तम विचार ।आधी आबादी को सम्मान से जीने का हक मिलना ही चाहिए ।

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