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कलाम सर:जनता के राष्ट्रपति,बच्चों के शिक्षक

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सपने वो नहीं होते जिसे आप सोते वक्त देखते हो

सपने वो होते हैं जो आपको सोने नही देते।

जीवन के प्रति ये नजरिया था भारत के पूर्व राष्ट्रपति अबुल पाकिर जैनुलआब्दीन(ए.पी.जे)अब्दुल कलाम का।आज पूरा विश्व उनकी 85वीं जयंती मना रहा है।कलाम का जन्म तमिलनाडु के रामेश्वरम में 15 अक्टूबर 1931 को एक गरीब मुस्लिम मछुआरा परिवार में हुआ था।उनके पिता अपनी नाव से हिन्दू श्रद्धालुओं को मंदिर पहुँचाने का काम करते थे।कलाम अपने 4 भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे थे।कलाम का बचपन अभावों में गुजरा।

कलाम जब थोड़े बड़े हुए तो अपने पिता के काम में उनका हाथ बटाने लगे,जब पिता किसी दूसरे काम में व्यस्त होते थे तो कलाम अपनी नाव से श्रद्धालुओं को मंदिर के दर्शन करने ले जाया करते थे और जब तक श्रद्धालु मंदिर से दर्शन करके वापस आते थे तब तक कलाम वहीं बैठ कर अपनी किताबें पढ़ते रहते थे।

तमाम मुश्किलों के बावजूद कलाम की पढ़ाई के प्रति बचपन से ही रूचि थी।प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए उन्होंने तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसफ कॉलेज में दाखिला लिया और 1954 में यहां से भौतिकी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की ।इसके बाद उन्होंने मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से एयरोस्पेस इंजीनिरिंग की पढ़ाई पुरी की।फाइटर पायलट बनने का उनका सपना उस समय टूट गया जब वो इसके लिए आयोजित परीक्षा में 9वें नम्बर पर आये और इसके लिए सिर्फ 8 सीटें ही निर्धारित थी।1960 में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन में वैज्ञानिक के रूप में काम करना शुरू किया।यहां उन्हें विक्रम साराभाई के नेतृत्व में काम करने का मौका मिला।1969 में उनका तबादला इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन में हो गया।यहां उन्हें भारत के प्रथम सॅटॅलाइट लांच व्हीकल (SLV-।।।) मिशन का प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनाया गया।ये परीक्षण सफल रहा ।

img-20161015-wa00041963-64 में उन्होंने नासा का दौरा किया।1970 से 1990 के बीच में कलाम ने पोलर सैटेलाइट लॉन्च वेहिकल (PSLV)और SLV-।।। को डेवेलप करने पर काम किया ,दोनों प्रोजेक्ट भी सफल रहे।1970 के दशक में कलाम ने बैलिस्टिक मिसाइल को डेवेलप करने का काम शुरू किया।कैबिनेट की असहमति के बाद भी इंदिरा गांधी ने अपने विशेषाधिकारों का प्रयोग कर कलाम को इसकी इजाजत दी और इसके लिए फंड भी मुहैया कराए ।1980 के दशक में तत्कालीन रक्षामंत्री आर वेंकटरमन ने इटेग्रटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP)के लिए कलाम के नेतृत्व में टीम गठन किया और इसके लिए कैबिनेट से 388 करोड़ रूपये की स्वीकृति इस प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृत कार्रवाई।इसी मिशन के तहत उन्होंने अग्नि और पृथ्वी जैसे मिसाइलों का सफल परीक्षण किया।1992 से 1999 के बीच कलाम प्रधानमंत्री के चीफ साइंटिफिक एडवाइजर और DRDO के सेक्रेटरी भी रहे।पोखरन -।। का प्रक्षेपण इसी समय किया गया था,जिसके वो चीफ प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर थे।इसी सफलता ने उन्हें देश का मिसाइल मैन बना दिया।कलाम को भारत के मिसाइल क्षेत्र में योगदान के लिए 1981 में पदम् भूषण और 1990 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया।1997 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर वो राष्ट्रपति बनने को राजी हुए।भाजपा ,कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सहयोग से उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में अपनी प्रतिद्वंदी लक्ष्मी सहगल को बड़े अंतर से हरा दिया।कलाम 25 जुलाई 2002 को भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।अपने पूरे कार्यकाल में वो जनता के राष्ट्रपति के रूप में प्रचलित हुए।वो हमेशा विद्यार्थियों के करीब रहे।अपने पूरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने उनके सामने रखे गए 21 में से 20 दया याचिकाओं पर कोई फैसला नहीं दिया।

25 जुलाई 2007 को उनका राष्ट्रपति के रूप ने कार्यकाल समाप्त हुआ।राष्ट्रपति पद से हटने के बाद वो एक बार फिर से पढ़ाई के क्षेत्र में सक्रिय हो गए और देश के विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में घुम घूम कर बच्चों को अपने ज्ञान के प्रकाश से उज्ज्वल किया।वो हमेशा कहते थे की वो हमेशा एक शिक्षक के रूप में याद किया जाना पसंद करेंगे।2010 में यूनाइटेड नेशन ने उनके जन्मदिन 15 अक्टूबर को विश्व विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाने का एलान किया,तब से हर वर्ष यह दिन पूरे विश्व में मनाया जाता है।बच्चे उन्हें कलाम सर कह कर ही सम्बोधित करते थे।वो पहले वैज्ञानिक और पहले अविवाहित व्यक्ति हुए जो राष्ट्रपति बने।अपनी मृत्यु के समय भी वो वही काम कर रहे थे जिसमें उन्हें सबसे अधिक आनंद आता था।27 जुलाई 2015 को वो आईआईएम शिलॉन्ग में विद्यार्थियों को संबोधित करते समय वो अचानक गिर गए ,जिसके बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया ,जहाँ कार्डिएक अरेस्ट के कारण उनकी मृत्यु हो गयी।उनकी मृत्य की खबर से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ पड़ी।उनके शव को वायुसेना के विमान से दिल्ली लाया गया।जहाँ एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,राष्ट्रपति,उराष्ट्रपति,दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ,तीनों सेनाओं के प्रमुख सहीत कई गणमान्य लोगों ने उनको नमन किया।

दिल्ली में उनके शव को अंतिम दर्शन के लिए उनके निवास स्थान पर रखा गया ,जहां हजारों लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किये।इसके बाद उनका शव रामेश्वरम भेजा गया जहां 30 जुलाई को उन्हें पुरे राजकीय सम्मान जे साथ सुपुर्दे खाख किया गया।इस समय भी प्रधानमंत्री ,केंद्रीय मंत्री,कई राज्यों के मुख्यमंत्री ,तीनो सेनाओं के प्रमुख सहित लाखों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए मौजूद थे।कई राज्यों ने उनके सम्मान में अपने की कॉलेज और विश्विद्यालयों का नाम उनके नाम पर कर दिया।उनकी किताब विंग्स ऑफ़ फायर,विज़न 2020 युवाओं में खासी लोकप्रिय हुई।

  • उनके मृत्यु उपरांत प्रसिद्द कवि डॉ कुमार विश्वास ने उनके लिए जो पंक्तियां कहीं वो उनके पूरे व्यक्तित्व को समाहित करता है। उन्होंने लिखा –
    “बहुत मुश्किल है कोई यूँ वतन की जान बन जाये
    तुम्हें फैला दिया जाये तो हिंदुस्तान बन जाये।”

कलाम सर के चरणों में नमन।

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