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नोटबंदी : बिना नोटिस दिए हीरो मोटोकॉर्प ने निकाले 600 कर्मचारी, पढ़ें पूरी खबर !

नोटबंदी लागु करते समय प्रधानमंत्री ने कहा था कि इस फैसले से कालेधन के कुबेरों,आतंकवादियों,माओवादियों और फर्जी नोट के कारोबार में जुड़े लोगों की कमर टूट जायेगी।इस फैसले के बाद गलत तरीके से पैसे कमाने वाले लोग रोयेंगे और गरीब और ईमानदार चैन की नींद सोयेंगे।अब जब नोटबंदी को 40 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं सरकार द्वारा बैन पैसे का बड़ा हिस्सा वापस बैंकों में आ चुका है, हाल ही में जम्मू कश्मीर में मारे गए एक आतंकवादी के पास भी 2000 का नोट मिला था, नये नोट के फर्जीवाड़े की भी खबरें कई जगह से आयी हैं।तब ये सवाल उठता है कि आखिर जब सब वैसे ही चल रहा है तो इस योजना से फायदा किसको और नुकसान किसको।

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अब तक हमने दिल्ली,लुधियाना में काम कर रहे मजदूरों की कहानी सुनी जो की नोटबंदी के बाद काम न मिलने के कारण वापस अपने गांव लौटने को मजबूर हैं।लेकिन अब जो खबर हम आपको बताने जा रहे हैं वो बेहद चिंताजनक है और नोटबंदी क बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर गहरा चोट करती है। ऐसी खबरें आ रही है कि देश की नम्बर एक टू व्हीलर कंपनी हीरो मोटोकॉर्प ने गुरुग्राम के अपने संयंत्र से करीब 600 से 700 ठेका मजदूरों की निकाल दिया है,और निकले गए मजदूर और उनके नेता कारण बताया जा रहा है नोटबंदी को। इस फैसले का सबसे दुखद पहलू यह है कि इन मजदूरों को पहले नोटिस भी नहीं दिया गया।

The Nachiketa से बात करते हुए कम्पनी से निलंबित और मजदूर यूनियन के पूर्व नेता भीमराव ने कहा कि नोटबंदी से बाजार पर हुए प्रभाव का बहाना बनाकर कम्पनी ने एक साथ इतने मजदूरों को काम से बाहर कर दिया है।इनमें से कई लोग 7-8 साल से काम कर रहे थे लेकिन उन्हें अबतक स्थायी नहीं किया गया जबकि कम्पनी ने पहले कहा था कि 5 साल काम करने के बाद हम मज़दूर को स्थायी कर देंगे।कम्पनी सुप्रीम कोर्ट के समान काम समान वेतन के आदेश का भी उल्लंघन कर रही है ।भीमराव ने बताया कि आज हम लेबर डिपार्टमेंट में अधिकारियों से भी मिले हैं और हमने उन्हें ज्ञापन सौंपा है की हमारे साथ न्याय होना चाहिये नहीं तो हम क़ानूनी कदम उठाने को बाध्य होंगे।

The Nachiketa के सवाल पर भीमराव ने कहा की कम्पनी सिर्फ मजदूरों को नौकरी से निकाल रही है जबकि बड़े अधिकारियों की नौकरी पर कोई खतरा नहीं है।

भीमराव ने हमें ये भी बताया कि जिन लोगों को बिना नोटिस के नौकरी से निकाला गया है उनके पास अपने परिवार के भरण पोषण के लिये भी पैसे नहीं हैं,क्योंकि गुरुग्राम जैसे महंगे शहर में जो व्यक्ति 10-12 हजार महीने के कमाता है उसके पास महीने का खर्च चलाने के बाद कुछ नहीं बचता,ऐसे में कम्पनी के इस एक निर्णय ने सैकड़ों गरीब परिवारों को सड़क पर ला दिया है।

भीमराव ने आगे की रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि 22 दिसम्बर को लेबर अफसर ने कम्पनी के अधिकारियों को बुलाया है और अपना रुख स्पष्ठ करने को कहा है अगर इस बैठक में कुछ ठोस नहीं निकलता तो हम आंदोलन करने को बाध्य होंगे।कंपनी कह रही है कि 2-3 महीने बाद जब नोटबन्दी का असर कम होगा तब वो हमें फिर काम पर रख लेंगे,लेकिन इसके लिये भी कुछ लिखित देने को तैयार नहीं है।

ये आगे देखना होगा की कम्पनी मजदूरों की बात मानकर उन्हें नौकरी पर बहाल करती है या नहीं।लेकिन अगर मजदूरों की बात पर यकीन किया जाए की हेरोमोटोकॉर्प जैसी मल्टीनेशनल कम्पनी पर भी नोटबन्दी का असर हो रहा है और इसके कारण सैकड़ों लोगों की नौकरियां जा रही हैं तो फिर ये सोचने वाली बात है की छोटे उद्योगों का क्या हाल होगा।

जिन घरों का चूल्हा आज नहीं जल रहा है वो देशहित के कारण मिले इस कष्ट को कैसे सहेंगे और क्या देश राष्ट्रनिर्माण के इस तथाकथित यज्ञ में दी गयी उनकी आहुति(नौकरियां गँवा कर)को स्वीकार करेगा और उन मजदूरों के लिये संघर्ष करेगा?

इन सब सवालों का जवाब है नहीं।सभी को अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी ,खासकर गरीबों की लड़ाई कौन लड़ता है।
हालाँकि कंपनी से जुड़े कुछ सूत्रों ने बताया कि कंपनी ने इन सभी कर्मचारियों को कुछ दिनों की छुट्टी पर भेजा है,कंपनी की तरफ से इस मसले पर कोई आधिकारिक बयान आना बाकी है ।
हम इस मामले से जुरी पल पल की खबर से आपको अवगत कराते रहेंगे।
ये खबर आपने सबसे पहले The Nachiketa पर ही पढ़ी है।

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