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जवानों की जेब पर बीएसएनएल की सर्जिकल स्ट्राइक

Photo credit-alamy stock photo
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रिलायंस इंफोकॉम ने जियो के माध्यम से जब ग्राहकों को चार महीने फ्री डेटा देने का एलान किया तो बीएसएनएल ने इसे टक्कर देने के लिए 249 रूपये में 300 जीबी ब्रॉडबैंड डेटा का प्लान प्रस्तुत किया।ग्राहकों को लगा की ये प्लान काफी अच्छा है और लोग बीएसएनएल से जुड़े भी। यहां तो प्रतिस्पर्धा थी ,लेकिन जहां बीएसएनएल का एकाधिकार है वहां बीएसएनएल पूरी तरह मुनाफाखोरी के मूड में आ गयी है।

अब आप कहेंगे कि ऐसी कौन सी जगह है?ऐसी जगह है भारत की सरहद ,यहां सुरक्षा कारणों से निजी कंपनियों को अपनी सेवा देने का लाइसेंस नहीं है।इसलिये ये काम बीएसएनएल के ही जिम्मे है।कहीं जंगल,कहीं नदी,कहीं पहाड़ तो कहीं रेगिस्तान ।इन दुर्गम इलाकों में देश की रक्षा करने वाले देश के जवानों को अगर अपने घर बात करनी हो तो उनके पास एक ही विकल्प है ,वो विकल्प है बीएसएनएल का सैटेलाइट फोन।पांच साल पहले केंद्र सरकार ने जवानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसके टावर यहां लगवाये थे।तब से जवान अपने घर इसी के जरिये बात करते हैं।अबतक इस सैटेलाइट फोन से बात करने पर जहाँ 1 रुपये प्रति मिनट की दर लगती थी वहीं अब बीएसएनएल ने इसकी दर बढ़ाकर पांच रुपये कर दी है ।सर्विस चार्ज मिला कर यह पांच रुपये पछत्तर पैसे हो गयी है।यानि लगभग छः गुनी बढ़ोतरी।

बीएसएनएल का कहना है कि उसे डिजिटल सैटेलाइट फोन टर्मिनल पर केंद्र सरकार द्वारा जो सब्सिडी मिलती थी वो अब बन्द हो चुकी है,ऐसे में उसके लिये पुरानी दरों पर सेवा देना काफी घाटे का सौदा है ।जब पिछले महीने राजनाथ सिंह सरहद पर पहुंचे थे तो जवानों ने उन्हें भी अपनी परेशानी बताई ,लेकिन इसका भी कोई असर नही हुआ।बीएसएफ के अधिकारी भी इस बात को मानते हैं कि सरकार के इस कदम से जवानों में बहुत निराशा है और सरकार को इसपे विचार करना चाहिये।
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एक तरफ तो जहाँ प्रधानमंत्री सर्जिकल स्ट्राइक के लिए सेना की पीठ थपथपा रहे हैं।वहीं दूसरी ओर सेना के जवानों को न्यूनतम सुविधाएं भी पुरे देश में सबसे ज्यादा पैसे चूका कर इस्तेमाल करनी पड़ रही है ।वहीं देश का आम नागरिक जियो पर फ्री में बात कर रहा है।
रक्षा मंत्री कहते हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक का फैसला इस लिये ले पाये क्योंकि इसमें आरएसएस की ट्रेनिंग थी,तो उनको अब ये भी बताना चाहिए की ये मामूली फैसला लेने में भी क्या फिर से आरएसएस की ट्रेनिंग लेनी की जरूरत है ?
जय हिंद।

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