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जवानों की शहादत की जिम्मेदारी कौन लेगा ? रक्षा मंत्री,प्रधानमंत्री या आरएसएस ?

29 सितम्बर को भारत की सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में घुस कर करीब 40 आतंकियों को मार गिराया आतंकियों के लॉन्च पैड ध्वस्त कर दिए और सकुशल वापस आ गये।भारतीय सेना ने इस तरह की सर्जिकल स्ट्राइक पहले भी की थी,लेकिन हमेशा इस बात को गोपनीय रखा गया।

इस बार सरकार ने ये तय किया कि इसकी जानकारी दुनिया को दी जाये।सेना ने इसकी जानकारी मीडिया के माध्यम से पूरे दुनिया को दी।देश के लोगों को सेना पर गर्व करने का एक और मौका मिला।इसके बाद इसपर जो राजनीती शुरू हुई वो भी हमने देखि।विपक्ष इसपे सवाल उठा रहा था तो सरकार ऐसे लोगों पर राष्ट्रिय सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीती करने का आरोप लगाया।पर असली राजनीती तो सरकार ने ही किया।सत्ताधारी दल का एक एक नेता इस सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री को दे रहा था।देश भर में पोस्टर लगाए गए,कई पोस्टर में तो सेना का नाम भी नहीं था,सेना के अलावा सभी को क्रेडिट दिया गया था।
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रक्षामंत्री का बीजेपी ने सम्मान किया।हमारे बड़बोले रक्षामंत्री ने इस सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय प्रधानमंत्री और खुद को दिया,सेना का नाम उनकी जुबां पर नहीं आया।फिर एक कार्यक्रम में उन्होंने इस सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय आरएसएस को दे दिया,कहा कि आरएसएस की ट्रेनिंग के कारण ही इतना कठिन निर्णय ले सके।मतलब की सेना को छोड़ कर बाकी सभी लोगों को क्रेडिट मिल गया ।इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान बौखला गया है और उसने बॉर्डर पर हमले तेज कर दिए हैं।पाकिस्तान ने कई गाओं को निशाना बनाते हुए भी फायरिंग की है और बम भी फेके हैं,जिसका हमारी बीएसएफ़ ने मजबूती से जवाब दिया है।पाकिस्तान की चौकियों को बीएसएफ ने बहुत नुकसान पहुंचाया है।15 पाकिस्तानी रेंजर के मारे जाने की भी खबर है।लेकिन इन सब के बीच हमने भी अपने 6 वीर जवान खो दिए।पाकिस्तान की हरकतों का जवाब देते हुए हमारे 6 जवान शहीद हो गये।सबसे दुःखद खबर 29 अक्टूबर को आयी जब हमें ये बात पता चली की माछिल सेक्टर में हमारे एक जवान मनदीप की शहादत के बाद उनके शव के साथ आतंकियों ने बर्बरता की और फिर पाकिस्तानी रेंजर की कवर फायर में बॉर्डर पार कर पाकिस्तान भाग गए।इसमें एक आतंकवादी मारा भी गया।
इस घटना के बाद कोई इसकी जिम्मेदारी लेने नहीं आया न रक्षामंत्री,न प्रधानमंत्री और न ही सत्ताधारी दल के बड़बोले प्रवक्ता।2013 में जब एक ऐसी ही घटना का शिकार जवान हेमराज हुए थे तो तब विपक्ष में रही पार्टी जो की आज सत्ता में है,उसके नेताओं ने पूरे देश में इसको मुद्दा बनाते हुए प्रदर्शन किए थे,तत्कालीन प्रधानमंत्री को सीधे सीधे निशाने पर लिया था।क्या सत्ताधारी दल ये सब भूल गया है?सेना की बहादुरी पर हरेक भारतीय को गर्व है,लेकिन जिस तरह सेना की कार्रवाई का चुनावी फायदा उठाने की
कोशिश की जा रही है,वो निंदनीय है।

Narendra modi (file photo)
Narendra modi (file photo)

अगर सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय प्रधानमंत्री,रक्षामंत्री और आरएसएस को जाता है ,सेना को नहीं तो फिर शहीदों के शहादत की जिम्मेवारी भी उन्हीं को लेनी होगी।

राष्ट्रहित के मुद्दे पर सरकार को चुनावी राजनीति से ऊपर उठ कर सोचना चाहिये।और सबसे पहले तो सरहद पर चल रहे स्थिति का आकलन करना चाहिये और जवानों की सुरक्षा को लेकर हरसम्भव कदम उठाने चाहिए।

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