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भाजपा नेता के अस्पताल ने नोट लेने से मना किया, इलाज में हुई देरी से बच्चे की मौत |

 

एक बहुत पुरानी कहावत है ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’जिसका अर्थ है कि जो नसीहत आप दूसरों को देते हैं उसे सबसे पहले खुद मानना चाहिए।लेकिन आज के दौर में हो रहा है इसका उल्टा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोट बैन करने की घोषणा के वक्त ये भी घोषणा की थी की 11 नवम्बर रात्रि 12 बजे तक सभी पेट्रोल पंप,रेलवे स्टेशन,सरकारी बस स्टैंड और अस्पताल में पुराने नोट स्वीकार किए जायेंगे।पुरे देश से ऐसी कई खबरें आयीं की ये संस्थान भी कई जगह 500 और 1000 के नोट नहीं के रहे हैं।पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोल पंप मालिकों को इसके लिये चेताया भी।लेकिन कहते हैं न की ‘जब सैयाँ भयो कोतवाल तो डर काहे का’ कुछ इसी बात को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री मोदी के आदेश को धता बता रहा है केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा का कैलाश अस्पताल।जी हां मंत्री जी खुद एक डॉक्टर हैं और उनका गाजियाबाद और बुलन्दशहर में कैलाश अस्पताल के नाम से एक अस्पताल चलता है।इसी अस्पताल से ऐसी खबरें सामने आयीं जो न सिर्फ विचलित करने वालीं थी,मानवता के लिये कलंक थीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी चिंता का विषय होंगी।अगर उनके मंत्री ही उनकी बात की सरेआम अनदेखी कर रहे हैं तो और लोग क्या करेंगे।
दरअसल एक खबर के अनुसार ये जानकारी मिली है कि महेश शर्मा के बुलन्दशहर स्थित कैलाश हॉस्पिटल में एक नवजात बच्चे की मौत हो गयी ।


अस्पताल ने 500 और 1000 रुपये के नोट लेने से मना कर दिया था और इस कारण इलाज में हुई देरी से बच्चे की मौत हो गयी।वहीं कैलाश हॉस्पिटल के गाजियाबाद शाखा में भी मरीजों को घुमा दिया जा रहा है।ये बेहद ही शर्मनाक बात है कि एक केंद्रीय मंत्री के अस्पताल में ऐसी असंवेदनशीलता देखने को मिल रही है।खैर डॉ महेश शर्मा अकसर अपने विवादास्पद बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं लेकिन इस बार उनका नाम जिस कारण आ रहा है वो बहुत ही शर्मनाक है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश सरकार को भी इस मामले को गम्भीरता से लेना चाहिये और अस्पताल तथा सभी दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए ।

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