Home / Entertainment / भूल गए न अल्ताफ राजा को :पहले ही कहा था तुम तो ठहरे परदेशी,साथ क्या निभाओगे।

भूल गए न अल्ताफ राजा को :पहले ही कहा था तुम तो ठहरे परदेशी,साथ क्या निभाओगे।

1990 का दशक ई देश के लिए बहुते क्रन्तिकारी बदलाव का दशक था।भले ही कोई ई गाना लिख दिया हो की देखो टू थाउजेंड जमाना आ गया,मिलके जीने का बहाना आ गया।लेकिन ई नयका जमाने में त लोग एक दूसरा से दुरे हुए ,नजदीक आने का तो बात ही नहीं।ई मामले में 90 का दशक जबरजस्त था।पूरा मुहल्ला एक साथ बैठके शर्मा जी के यहां रामायण,महाभारत और रंगोली देखता था।बच्चा लोग का अलग डिमांड था शक्तिमान का रूप में।अब तो एक ही घर में 3-4 गो टीवी है।लोग अपने ही घर में अलग हो गए हैं मुहल्ला को कौन पूछता है।हाँ तो हम बात कर रहे थे क्रन्तिकारी बदलाव के बारे में।शुरुआत हुआ भारत का खजाना खाली होने से,बाद में कौनो लोग बताया की सरकार ज्यादा नोट छाप लिया था ।ज्यादा नोट रखना भी कंगाल बनाता है ई हमको तभिये पता चला।तो अपने मनमोहन चचा रहे वित्तमंत्री ,उ तुरंत फार्मूला निकाल लिए ,बोले की ग्लोबलैजेशन करेंगे ।किये भी ,भारत में नया कम्पनी आया तरक्की हुआ,लोग के पास पैसा आया ।दिल्ली बम्बई में चलने वाला कान्वेंट स्कूल अब बिहार के लखीसराय ,जमुई भी पहुंचने लगे था।गांव के लौंडे लोग का असली समस्या तभी आया।जब अंग्रेजी मीडियम से उनका पाला परा।उ लोग अभी तक महीना को सावन ,भादो ,आसीन ,कातिक के रूप में जानता था,अब उ लोग को जनवरी फरवरी लर्न करना था ।ई न होने पर रोज मास्टर का डंडा लग रहा था।तब उदय हुआ अल्ताफ राजा का जो की इन बच्चों के लिए भगवान से कम नहीं थे ,अल्ताफ ने एक गाने में बारहो महीना सब को रटवा दिया।उ गाना था तुम तो ठहरे परदेशी साथ क्या निभाओगे
वैसे तो ये गाना अपने बेवफा प्रेमिका के लिए था ,लेकिन विद्यार्थियों के लिये इसमें बड़ी काम की बात थी ,वो बात थी

जब तुमसे इत्तिफाकन मेरी नजर मिली थी,मुझे याद आ रहा है शायद वो जनवरी थी
…….
बेकैफ था दिसम्बर जज्बात मर चुके थे
मौसम था सर्द उसमे अरमां बिखर चुके थे

बस फिर क्या था कमजोर विद्यार्थियों के लिए ई रामबाण हुआ और उ लोग एक दिन में पूरा जनवरी फरवरी रट गये।अल्ताफ राजा का ई योगदान आज के हनी सिंह सुनने वाले लौंडे क्या जानेंगे?1997 में अल्ताफ राजा लेकर आये तुम तो ठहरे परदेशी, साथ क्या निभाओगे?ये गाना तो जैसे शादी ,बराती का एंथम बन गया।जब ये गाना रेडियो पर बजता था तो पूरा झुमरीतलैया झूम जाता था।आज दिल्ली के लौंडे जब कहीं लड़ाई करते हैं तो दोस्तों को फ़ोन करके कहते हैं भाई बन्दे लेके आजा पंगा हो गया है।ये उन्होंने जाने अनजाने अल्ताफ राजा से ही सीखा है।ये बात अलग है कि वी ये काम बड़ी आसानी से कह देते थे की यारों मैंने पंगा ले लिया।ये बात अलग है कि उनका पंगा दूसरे किस्म का होता था।

1a020f14-b332-409c-a0c0-3796d48ab045यही वो दौर था जब तीसरी चौथी क्लास के बच्चे भी एक शायरी की डायरी रखने लगे थे और उसे अल्ताफ राजा के अंदाज में बोलने की कोशिश करते रहते थे।ये बात अलग है कि इस चक्कर में कई बार उनकी मास्टरों ने जबरदस्त सुताई भी कर दी।कहा जाता है कि कलाकार वही बड़ा होता है जो गरीबों के दिल में बसे ,जितने भी टेम्पू ,ट्रक, ट्रेक्टर के ड्राइवर थे उनका हमसफर तो अल्ताफ राजा के गाने ही होते थे।

कई बार तो ऐसी भी खबरें आई की मालिकों ने मजदूरों को अल्ताफ के गाने सुनाके उनसे ज्यादा काम ले लिया।आज भी इस वर्ग की पहली पसंद अल्ताफ ही हैं,भले वो अब इनका पहले जैसा साथ नहीं निभा पाते और अब कभी कभी एकाध गाना लेके आ जाते हैं।हाँ लेकिन जब भी आते हैं धमाका कर देते हैं,और अपने इस ड्राइवर समर्थक वर्ग का बखूबी ख्याल रखते हैं पिछली बार जब हंटर में उनका गाना आया तो उन्होंने पूरा गाना टेम्पू में ही गाया ।ये गाना था दिल चुराना तो मेरी आदत है।बिलकुल हम कहेंगे कि इसमें तो कोई शक नहीं।आज अल्ताफ राजा के जन्मदिन पर उन्हें बहुत बधाइयाँ और हम उनसे यही कहेंगे कि
आवारा हवा का झोंका हैं ,तो
आ निकलिए पल दो पल के लिए।

Comments

About Akshay Anand

mm
Akshay Anand write about the Political category at thenachiketa

Check Also

sarkar-3_650x400_81476769217

सरकार -3 में केजरीवाल से प्रेरित किरदार निभाएंगे मनोज वाजपेयी

  राम गोपाल वर्मा  की आने वाली फिल्म सरकार-3 में मनोज वाजपेयी,दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द …

Advertisment ad adsense adlogger