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‘अब ये नोट नहीं चलेगा’ सुनकर बृद्ध महिला की मौत, पुलिस ने पल्ला झाड़ा ।

 

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8 नवम्बर की रात 8 बजे जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने संबोधन में 500 रुपये और 1000 रुपये के पुराने नोट को बंद करके उनकी जगह 500 और 2000 रुपये के नये नोट लाने की बात कही तो पूरे देश में अफरातफरी मच गयी।लोग एटीएम से 100 रुपये के नोट निकालते नजर आये,पेट्रोल पंपों पर लंबी भीड़ नजर आयी।देश भर से कई जगह से पेट्रोल पंप,दवाई दुकानों,टॉल प्लाजा पर झड़प की भी खबरें आयी।आम लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया लेकिन इसे लागू करने के तरीके पे ऐतराज जताया।अगर सरकारें जनता से जुड़े कोई निर्णय इतनी हड़बड़ी में जनता पर थोपती है तो उसके ऐसे ही परिणाम सामने आते हैं।

लेकिन इन खबरों के बीच उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से एक ऐसी खबर आयी जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया और मोदी सरकार के इस आपाधापी में लिया गये निर्णय का स्याह चेहरा हमारे सामने ला दिया।मामला खबराभार गांव का है,गांव की तीर्थराजी देवी गांव में ही अपने परिवार के साथ मिलकर कपड़े धोने का काम करती थी।और अपने खून पसीने की कमाई की पाई पाई जोड़कर कुछ हजार के नोट जमा किये थे।

बुधवार की रात जब उसे पता चला की सरकार ने 1000 और 500 के पुराने नोट वापस ले लिये हैं तो वह काफी परेशान हो गयी,आज सुबह होते ही वह चन्द 1000 के नोट लेकर सेंट्रल बैंक की शाखा उसे बदलने पहुँची, वहां पहुंच कर उसे पता चला की बैंक बन्द है।वहीं उसके हाथ में ये नोट देखकर किसीने कह दिया की ये नोट अब नहीं चलेंगे ,अब तो ये बेकार है।ये बात सुनकर तीर्थराजी को ऐसा झटका लगा की दिल का दौरा पड़ गया और वो वहीं गिर गयी ।तुरन्त ही उनकी मौत हो गयी ।उनकी मृत्यु की सुचना जब उनके परिवार वालों को दी गयी तो वो रोते बिलखते वहां पहुंचे।उनके शव को अंतिम संस्कार के लिये गण्डक के तट पर लाया गया।
इस मामले में डीएम शम्भू कुमार का कहना है कि वह राजस्व विभाग की टीम को जाँच के लिये उनके घर भेजेंगे उसके बाद ही इस पर कोई प्रतिक्रिया दे पायेंगे।एक और गरीब की मौत जाँच पड़ताल की सरकारी फाइलों में उलझ कर रह जायेगी और नतीजा तो कुछ नहीं ही निकलना है।

कहा गया कि ये कालाधन के बड़े सौदागरों की कमर तोड़ने का प्रयास है,वो एक झटके में कंगाल हो गये, उनका तो पता नहीं की कितने लोग कंगाल हुए,लेकिन तीर्थराजी जैसे लाखों गरीबों की जिंदगी मुश्किलों से जरूर भर दी है,जिन्हें पैसे होते हुए भी राशन,दवाई के लिये संघर्ष करना पर रहा है।इनमें से जतदातर के पास न बैंक अकाउंट है,न कोई पहचान पत्र,ऐसे में उनकी जिंदगी भर की कमाई के बर्बाद हो जाने का खतरा बढ़ गया है,बड़े थैलीशाह तो इसका भी कोई तोड़ निकाल ही लेंगे।इसलिये सरकार को ऐसे निर्णय करने से पहले पुरी तैयारी करनी चाहिए,न की आपाधापी में ऐसे निर्णय देश पर थोपने चाहिये।

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