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राष्ट्रीय राजनीति में ताकतवर विकल्प के रूप में उभरती “आप”

दिल्ली की सत्ता संभाल रही आम आदमी पार्टी और इसके नेता अरविन्द केजरीवाल भले ही ज्यादा समय आपको उपराज्यपाल से जंग को लेकर विवादों में नजर आये।लेकिन यह पार्टी बड़ी ही ख़ामोशी से देश के दूसरे राज्यों में अपना विस्तार करने में जुटी है।कई ऐसे राज्य हैं जहाँ यह अच्छी स्थिति में भी है ।पंजाब के बारे में तो सभी को पता ही है कि 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में अगर आम आदमी पार्टी पर किसी राज्य के लोगों ने भरोसा किया था तो वो राज्य था पंजाब।पंजाब ने पार्टी के 4 सांसद लोकसभा में भेजे थे।इसके बाद ही केजरीवाल को यहां सम्भावना नजर आयी।और लोकसभा चुनाव जे बाद से ही पार्टी ने यहां संगठन बनाने पर जोर दिया।और आज पार्टी इस स्थिति में है कि अब तक आये सभी ओपिनियन पोल में पार्टी की सरकार बनती दिखाई जा रही है,कुछ ओपिनियन पोल तो पंजाब में भी दिल्ली जैसी सफलता दोहराने की बात कर रहे हैं।पंजाब के बारे में तो बहुत कुछ लिखा जा रहा है,तो आज हम बात करेंगे पंजाब के अलावा दूसरे ऐसे राज्यों की जहाँ आम आदमी पार्टी अपने लिए जमीन तलाश रही है।article-afyrkqrqgb-1452839158

स कड़ी में सबसे पहला नाम आता है गोवा का।राज्य छोटा है,सिर्फ 40 सीटें हैं लेकिन यहां मिली जीत का असर देशव्यापी होगा,क्योंकि देश के रक्षा मंत्री यहीं से आते हैं,और उन्हें रक्षा मंत्री बनाने के लिए ही उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था।गोवा में ये चर्चा आम है कि मुख्यमंत्री भले ही कोई और हो पर सुपर सीएम तो पर्रिकर ही हैं,और वहां अगर भाजपा हारती है तो ये पर्रिकर और मोदी की जोड़ी के लिये गहरा झटका होगा।जबकि यहां आम आदमी पार्टी के लिए खोने को कुछ नहीं है।अगर वो मुख्यविपक्षी पार्टी भी बन गयी तो भी ये बहुत बड़ी उपलब्धि है।हालांकि पार्टी नेता जीत के प्रति आश्वस्त हैं और केजरीवाल ने 40 में 35 सीट जितने का दावा किया है।चुनाव फरवरी -मार्च में पंजाब के साथ ही होने की संभावना है।

अगला राज्य जिसके बारे में हम बात करेंगे वो बीजेपी ,नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए नाक का सवाल है।जी हां वो राज्य है गुजरात ।मोदी ने पूरे देश में गुजरात मॉडल के विकास को मुद्दा बनाकर ही लोकसभा का चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की।ऐसे में गुजरात में आम आदमी पार्टी की बढ़ती गतिविधियों ने भाजपा नेताओं को सिरदर्द दे दिया है।गुजरात में पटेल आंदोलन के बाद परिस्थितियां पहले से ही बीजेपी के खिलाफ है और ऐसे में आम आदमी पार्टी दखल परेशानियां खड़े कर सकता है।भले ही बीजेपी के नेता गुजरात में आप के बढ़ते प्रभाव को मानने से इनकार करें, लेकिन अंदर अंदर डर तो है

इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि गुजरात में जहां अमित शाह ,नरेंद्र मोदी और कॉग्रेस के नेताओं की रैलियां हो रही हैं वहीं अरविन्द केजरीवाल की 16 अक्टूबर को सूरत में होने वाली रैली के लिए प्रशासन ने लगभग एक महीने तक इजाजत नहीं दी।मजबूरन आम आदमी पार्टी हाइकोर्ट गई और तब हाइकोर्ट के निर्देश पर पर प्रशासन ने इस रैली के लिए इजाजत दी

इससे पहले भी एक बार सूरत में ही व्यापारियों द्वारा एक विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम में आयोजित एक कार्यक्रम की अनुमति यूनिवर्सिटी ने रद्द कर दी थी,कहा गया कि ये सरकार के दवाब में उठाया गया कदम था।जब से आम आदमी पार्टी को रैली की इजाजत मिली है तब से इसकी तैयारियों ने जोड़ पकड़ा है,सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक कार्यकर्ता लोगों को इस कार्यक्रम की जानकारी दे रहे हैं और आने की अपील कर रहे हैं।दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा के नेतृत्व में पार्टी ने एक मोटरसायकल रैली का आयोजन लोगों को इस रैली की जानकारी देने के लिए किया।
img-20161009-wa0088राजनितिक विशेषज्ञ इस रैली को अरविन्द केजरीवाल का गुजरात में शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं और जाहिर है कि निशाने पर पीएम मोदी ही रहेंगे।केजरीवाल भी इस रैली को सफल बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं ,इसीलिए उनकी पार्टी के कई बड़े नेता कई दिनों से गुजरात में डेरा डाले हुए हैं,और खुद रैली की एक एक बारीकी पर ध्यान दे रहे हैं।कपिल मिश्रा का कहना है कि बीजेपी आप के रैली के पोस्टर फाड़ रही है,उनपर कालिख पोत रही है।ताकि लोग रैली के बारे में नहीं जान सकें।केजरीवाल की रणनीति मोदी को गुजरात में पटखनी देने की है।और उसकी शुरुआत 16 अक्टूबर को होने वाली रैली से ही होगी।बहरहाल केजरीवाल इसमें कितने कामयाब होंगे उसके लिए हमें 16 अक्टूबर का इंतेजार करना होगा।
2017 में आप जहाँ भी चुनाव लड़ रही है या जहाँ संगठन बना रही है उसमे गौर करने वाली बात ये है ज्यादातर राज्यों में अबतक मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच होता था।आप यहां तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रही है।पंजाब में मुख्य मुकाबला अकाली-बीजेपी गठबंधन और कांग्रेस के बीच में होता रहा है।जानकारों का कहना है कि आप यहां कांग्रेस के वोट में ज्यादा सेंधमारी करेगी ,अकाली के खिलाफ तो लहर है ही।ऐसे में कांग्रेस का सत्ता में आने का सपना आप फिर से चूर कर सकती है।गोवा में भी बीजेपी कांग्रेस ही मुख्य रूप से सक्रिय हैं ।यहां भी कांग्रेस 5 साल से सत्ता से बाहर है और आप यहां भी कांग्रेस का इंतेजार लम्बा कर सकती है।गुजरात में तो कांग्रेस पहले से जमीन पर है ,उसे उम्मीद थी की मोदी के जाने के बाद वो सत्ता में वापस आ सकती है,लेकिन आप यहां भी उसकी जगह लेने आ गयी है।गुजरात में नवम्बर 2017 में चुनाव होने हैं और अगर पार्टी पंजाब और गोवा में अच्छाप्रदर्शन करती है तो जाहिर है इसका फायदा उसे गुजरात में भी मिलेगा।

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आम आदमी पार्टी की ओवरसीज विंग भी बहुत मजबूत हो रही है।और इसके कनाडा,अमेरिका,इंग्लैंड सहित कई देशों में हज़ारों NRI वालंटियर हैं।ओवरसीज विंग की कमान डॉ कुमार विश्वास के हाथ है और उन्हें विदेशों में अपनी लोकप्रियता का भी काफी फायदा हुआ है।आज ओवरसीज विंग के कई सदस्य पंजाब आकर चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं और पार्टी को चन्दा भी दे रहे हैं।

इसके सिवा और भी कई राज्य हैं जहाँ अभी चुनाव तो नहीं है लेकिन आप यहां विकल्प बनने की कोशिश कर रही है और ज्यादातर जगहों पर इसका मुख्य मुकाबला बीजेपी से है।हरियाणा में भले ही कई क्षेत्रीय पार्टियां भी हो पर आप यहां भी बीजेपी के खिलाफ कई आंदोलन करके कांग्रेस की जगह हथिया रही है।यूपी, बिहार,झारखण्ड में कई क्षेत्रीय दल भी हैं और यहां भी पार्टी अपना जनाधार बढ़ाने में जुटी है।बिहार में जहां परवीन अमानुल्लाह पार्टी का जनाधार मुहल्ला सभाओं और अन्य कई तरीके से बढ़ाने में जुटी है तो वहीं झारखण्ड में बिहार-झारखंड प्रभारी और दिल्ली विधायक संजीव झा सक्रिय हैं और कई मुद्दों पर अपनी राय उठाते रहते हैं।ओडिशा में आप ने इसी महीने एक विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया ,जिससे प्रदेश की राजनीती में हलचल मच गयी।यहां मुख्य मुकाबला बीजू जनता दल और कांग्रेस के बीच में होता है,जाहिर है कांग्रेस के लिए यहां भी चिंता की बात है।महाराष्ट्र में पहले से आप का अच्छा संगठन है।

इसके अलावा ,उत्तराखण्ड,मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़,हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में आप संगठन का विस्तार कर रही है और इन राज्यो में भी उसे बीजेपी के सामने विकल्प के रूप में ही उभरना है।इन चीजों को ध्यान में रखते हुए यही कहा जा सकता है आप का पहला लक्ष्य ऐसे राज्य हैं जहां 2 पार्टियों में मुख्य मुकाबला है और जो छोटे राज्य हैं ,बड़े राज्यों में उसकी रणनीति आगे चलकर सामने आएगी।

इसलिये ये कहा जा सकता है कि की कांग्रेस और बीजेपी को अब आम आदमी पार्टी को दूसरे राज्यों में भी सीरियसली लेना चाहिए।

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One comment

  1. manvinder singh kohli

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